बोधगया में 12वां अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटिक सूत्त पाठ शुरू

गया। बौद्ध संप्रदाय की तीर्थस्थली और विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बिहार के बोधगया में ‘लाइट आफ बुद्धा धम्मा फाउंडेशन इंटरनेशनल’ के तत्वावधान में आयोजित होने वाला 12वां अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटिक सूत्त पाठ का शुक्रवार को विधिवत उद्घाटन हुआ। यह सूत्त पाठ 13 दिसंबर तक चलेगा। समारोह का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधिवृक्ष की छांव में किया। इसके बाद विभिन्न देशों से आए बौद्ध धर्मगुरुओं द्वारा विश्वशांति की कामना के साथ महाबोधि मंदिर में त्रिपिटक सूत्त पाठ प्रारंभ हो गया। राज्यपाल ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकतावादी विकास के बावजूद मानव आज भी अकेला है, आज हमें तृष्णा, लोभ व मोह से मुक्ति के लिए फिर से बुद्ध वचन के नजदीक जाना होगा।

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उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर को बौद्ध जगत के कई देशों के श्रद्धालु गया के जेठियन जाएंगे और फिर राजगीर की यात्रा होगी। यह पदयात्रा कई मायने में ऐतिहासिक होगी। उन्होंने कहा कि बोधगया से एक बार फिर से बुद्ध के वचनों की गूंज से वैश्विक शांति का प्रयास होगा। उद्घाटन के पहले रायल थाई मंदिर से कालचक्र मैदान तक शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालु पारंपरिक परिधान पहने हुए थे और प्रार्थना गीत गाते हुए आगे बढ़ रहे थे। पूजा समापन के बाद 13 दिसंबर को सभी बौद्ध भिक्षु जेठियन से पद यात्रा करते हुए वेणुवन राजगीर जाएंगे।

त्रिपिटक पूजा में भाग लेने के लिए विभिन्न देशों के बौद्ध धर्मगुरु बोधगया पहुंचे हैं। बंगलादेश, श्रीलंका, कम्बोडिया, म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, वियतनाम, भूटान सहित विभिन्न देशों के धर्मगुरुओं के साथ बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु भी त्रिपिटक पूजा में भाग लेने यहां आए हैं। पूजा को लेकर पूरे क्षेत्र को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कई देशों के बौद्ध श्रद्धालु पारंपरिक वाद्ययंत्र के साथ यात्रा में शामिल हुए। इस समारोह को लेकर महाबोधि मंदिर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। मान्यता है कि पवित्र महाबोधि वृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।