भारत-नेपाल सुरक्षा संबंधों पर 11 से दो दिवसीय गोष्ठी

देहरादून । भारत के सीमांत क्षेत्रों की तनाव पर अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद चिंतित है। विशेषकर भारत नेपाल संबंधों पर यह चिंता और महत्वपूर्ण हो गई है। रोटी बेटी का संबंध रखने वाले दोनों देशों के बीच कुछ वर्षों से रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर वर्षों से काफी गतिरोध आने लगे हैं, जबकि भारत नेपाल का ऐतिहासिक राष्ट्रीय संबंध दोनों राष्ट्रों को मजबूत करता है।

इसी संदर्भ में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष राजीव बेरी, उपाध्यक्ष दयानंद चंदोला, एसएस कोठियाल, सुधांशु कुकरेती तथा अशोक शर्मा द्वारा राजपुर रोड स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। वार्ता में दोनों देशों की मैत्री और मजबूत करने पर चर्चा की गई।

इसका आधार रामायण,महाभारत जैसे प्राचीनग्रंथों को लिया गया। साथ ही साथ इस संदर्भ में गौतमबुद्ध जैसे महात्मा की भी विशेष चर्चा की गई। संगठन के अध्यक्ष राजीव बेरी एवं उपाध्यक्ष दयानंद चंदोला का कहना है कि भौगोलिक दृष्टि से दोनों देशों की सीमाएं 1850 किलोमीटर हैं,जो मुक्त सीमाएं हैं।

रिश्ते और सामाजिक आदान-प्रदान से दोनों देशों में मैत्री लगातार रही है। भारत नेपाल रिश्तों को कैसे मजबूत बनाया जाये यह आज की आवश्यकता है। एआरएसपी (अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद) लगातार इस संदर्भ में प्रयासरत है। नीति अनुसंधान परिषद जो नेपाली संस्था है। इस संदर्भ में भारत नेपाल मैत्री के संदर्भ में काफी प्रयासरत है।

इसी संदर्भ में भारत नेपाल मैत्री रक्षा और सुरक्षा संबंध विषय पर 11 से 12 अप्रैल को वन अनुसंधान संस्थान में एक संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। जिसमें 06 प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की जाएगी। इस संदर्भ में नेपाल से एक विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंच रहा है तथा भारत की ओर से भी कुछ विशिष्ट विभूतियां इस अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल रहेंगी।

इनमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन सचिव सुनील अम्बेकर के साथ-साथ सुरक्षा बलों के पूर्व आईजी किशोर लांबा, एनआईडी के लिए पूर्व प्रमुख देवीराम शर्मा, रिटायर्ड मेजर जनरल नर बहादुर कंदेल, रि.ब्रिगेडियर धर्म बहादुर बनिया समेत नेपाल के प्रमुख सुरक्षा विशेषज्ञ तथा विशिष्ट जन इस संगोष्ठी में पहुंच रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद जो भारत नेपाल के संबंधों की एक महत्वपूर्ण संस्था है की स्थापना 1978 में की गई थी। यह स्वयंसेवी संस्था लगातार भारत नेपाल के संबंधों को वसुधैव कुटुम्बकम के रूप में देख रही है। जो भारत की मूल आत्मा है। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद की स्थापना ने कई ऐसे महत्वपूर्ण लोग जुड़े हैं।

जो देश के जानी मानी हस्तियों में शामिल हैं। ऐसे ही लोगों में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. धर्मवीर, फिजी में पहले उच्चायुक्त भगवान सिंह, डॉ. सरोजिनी महिषी, लखन लाल मल्होत्रा, पूर्व सचिव वेद प्रकाश गोयल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा पूर्व विदेश सचिव शशांक,एम्बेसडर विरेन्द्र गुप्ता तथा स्व.बालेश्वर अग्रवाल जैसे लोग जुड़े रहे हैं।

यह संस्था लगातार इन संदर्भों में कार्य कर रही है तथा कई अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं। जिनमें भारी संख्या में विदेशों से लोग शामिल रहे हैं। संस्था का कार्यालय प्रवासीय भवन 50 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग दिल्ली में स्थित है। उन्होंने कहा कि 11 अप्रैल को संस्था द्वारा एक विशेष आयोजन किया जा रहा है। भारत नेपाल के बीच सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी मामलों के साथ-साथ मौद्रिक विषयों पर भी चर्चा होगी।

संस्था के स्थानीय अध्यक्ष उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बेरी का मानना है कि भारत नेपाल के बीच सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी मामलों पर अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद भारत तथा नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल के बीच आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन वन अनुसंधान संस्थान देहरादून में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की गरिमामय उपस्थिति में किया जा रहा है।

जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विदेश सचिव नेपाल सरकार तथा अध्यक्ष के रूप में पूर्व विदेश सचिव भारत एवं संगठन के संरक्षक शशांक विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। भारत नेपाल ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से एक दूसरे के काफी नजदीक हैं इसी मैत्री को और गहरा करने के लिए इस तरह की गोष्ठियां महत्वपूर्ण साबित होती हैं। इन दिनों भारत नेपाल के बीच काफी समस्याएं हैं, जिन्हें भी इन गोष्ठियों के माध्यम से दूर किया जाएगा। गोष्ठी की संरचना जिन विशिष्ट लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है।