मेरठ में आखिरकार पकड़ा गया तेंदुआ

मेरठ। दहशत का प्रर्याय बना तेंदुआ छावनी के फाजलपुर आर्मी के वेयर हाउस में आखिरकार पकड़ा गया है। वन विभाग ने ट्रेंक्यूलाइजिंग डार्ट के जरिए तेंदुए को बेहोश किया और उस पर काबू पाया। तेंदुए के हमले में वन विभाग का एक अधिकारी घायल हो गया था।

कई दिनों से शहर में तांडव मचाने के बाद तेंदुआ अब काबू में कर लिया गया। तेंदुआ को पकड़ने के लिए सेना और पुलिस के 200 से ज्यादा जवान लगा दिए गए थे। कानपुर चिड़ियाघर, दुधवा नेशनल पार्क से विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई थी। तेंदुआ पकड़ने में नाकाम डीएओ मनीष मित्तल को शासन से हटा दिया गया था।

बता दें कि मंगलवार देर रात मेरठ के सैन्य अस्पताल से भागे तेंदुए ने बुधवार को सेना क्षेत्र में जमकर कोहराम मचाया। सवेरे से अब तक तेंदुए के हमले में कम से कम आधा दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना है। मंगलवार को सेना अस्पताल में सवेरे करीब पौने आठ बजे पहली बार उस समय तेंदुआ देखा गया था जब अस्पताल के हेल्थ इंस्पेक्टर विष्णु तिवारी अपने ऑफिस का ताला खोल रहे थे। वह तेंदुए के हमले में बाल बाल बच गए थे। भागने के दौरान तेंदुए के पंजे में चोट आ गयी थी। कुछ देर गायब रहने के बाद करीब 12 बजे तेंदुए को अस्पताल में ही एक पीपल के पेड़ पर देखा गया था।

मेरठ में साल 2014 में10 दिन तक तेंदुए का खौफ रहा था। बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था और दुकानदारों ने दुकान समेट ली थी। मेरठ के छावनी क्षेत्र में 25 महीने पहले आए तेंदुए के कारण जो दहशत का माहौल बना था, वह कल से फिर शुरू हो गया। असल में कल मिलिट्री हास्पिटल में तेंदुआ देखा गया। हॉस्पिटल के सी ब्लाक के सघन पेड़ों के बीच तेंदुआ बैठा रहा. वन विभाग के स्टाफ और एक्सपर्ट के सामने समस्या यह थी कि पेड़ पर बैठे तेंदुए की सिर्फ बैक बोन दिख रही थी। ट्रंकुलाइज केवल शोल्डर और हिप पर किया जाता है. बैक बोन पर शूट किया गया तो पैरालाइसिस हो सकता है।