डॉक्टरों के मृतक के परिजनों से कहा पैसा लाओं, शव ले जाओ

रुड़की।  रुड़की में रुपए की कमी के कारण एक निजी अस्पताल ने दो दिन से परिजनों को उनके मरीज का शव उठाने नहीं दिया है परिजनों का अस्पताल के चक्कर लगाते लगाते आज गुस्सा फूटा और उन्होंने अस्पताल के बाहर जमकर नारेबाजी की।

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परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा की हमारे मरीज की मौत हो गई है जबकि उसकी हालात गंभीर थी लेकिन डॉक्टर ने उसे रेफर नहीं किया। इसीलिए उसकी मौत हो गई हमने अस्पताल के 20 हजार रुपए भी चुकाए है लेकिन हमसे 60 हजार रुपए और मांगे जा रहे हैं हमने कहा की आप हमें बिल दे दो कि आपने हमारे मरीज का क्या इलाज किया है लेकिन अस्पताल वाले बिल नहीं दे रहे हमारा कहना है नोटबंदी के कारण हमारे पास कैश नहीं है हम आपको चेक दे देते है कितने रुपए का चेक देना है हमें बिल दे दीजिये लेकिन अस्पताल वाले मान नहीं रहे है और दो दिन से हमारे मरीज के शव को यही रखा हुआ है।

दरअसल चार दिन पहले मृतक बिट्टू उत्तरप्रदेश के जलालाबाद में बाइक से कही जा रहा था जहां उसका किसी अज्ञात वाहन से एक्सीडेंट हो गया था जिसके बाद बिट्टू के परिजन उसे उपचार के लिए सहारनपुर सरकारी अस्पताल ले गए जहां से उसे रुड़की के एक छोटे से निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जहां उसकी मौत हो गई और अब अस्पताल वाले कैश रुपए ना होने के कारण शव को उठाने नहीं दे रहा। 

बड़े अफ़सोस की बात है कि जिस डॉक्टर को हमारा समाज रक्षक और परोपकारी के रूप में देखता है वही आज का लालची डॉक्टर मरीज की मौत के बाद शव को उसके परिजनों को केवल इसलिए नहीं उठाने देता क्योंकि उस समय परिजनों के पास चुकाने के लिये नगद रूपये नहीं होते बावजूद इसके की परिजन बार-बार गिड़गिड़ाते है कि उनका कोई भी सामान गिरवी रख लो बस दाह संस्कार की मोहलत दे दो उसके बाद बकाया बिल चुका देंगे  लेकिन डॉक्टर का इतने पर भी दिल नहीं पसीजता क्योंकि चिकित्सक के लिए पैसा ही सबसे अहम और ज़रूरी है।

rp_shakeel-anwer-roorkee-uttarakhand शकील अनवर, संवाददाता